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Maharaj Shiv Chhatrapati

इंद्र जिमि जृंभपर !
बाडव सुअंभपर !
रावण सदंभपर !
रघुकुल राज है !!
पौन वारिवाह पर !
संभु रतिनाह पर !
ज्यो सहसवाह पर !
राम द्विज राज है !
दावा दृमदंड पर !
चिता मृगझुंड पर !
भूषण वितुंड पर !
जैसे मृगराज है !!
तेज तमअंस पर !
कान्न्ह जिमि कंस पर !
त्यों म्लेंच्छ बंस पर !
शेर शिवराज है !!
शेर शिवराज है !!
शेर शिवराज है !!
शेर शिवराज है !!
शेर शिवराज है !!
–कवीराज भूषण.

Kaviraj Bhushan has used the abovesaid words to describe Shivaji. He further says

काशी की कला जाती, मथुरा में मस्जिद होती,

अगर ना होते शिवराय, तो सून्नत होती सबकी।।

The above couplet is just to give my readers an idea about how Shivaji must have worked in his lifetime. Am not going into the story telling part today but would love to highlight his few qualities, so that we all can pay a befitting tribute to the great warrior king.

Complete and unwavering trust in God : हे राज्य व्हावे, ही श्रींची इच्छा. This kingdom is being built on the wishes of the Almighty. Utmost trust in God at any age is a rarity in this world. Even today we might have a few people like him who trust God completely.

Self Confidence : With a small group of 5-7 Mavlas (soldiers), 2-3 mules and a few rupees (asharfi as it was called then), a young boy of 13-14 years, decides to build a kingdom to kick out the kings who behaved like masters and treated their people like slaves. What a self confidence! Our kids at the age of 13-14 cannot even decide their future career.

Great Planner : As seen in both the instances of Afzal Khan Vadh and Attack on Lal Mahal at night to kick out Shaistekhan from Maharashtra again require lots of planning. It also shows his capabilities of understanding his own limitations. Fighting the Mughals or the Bijapur Kingdom is plains would have been a harakiri, so draw them into a situation favourable to us.

An Astute Statesman : During the war of Fort Purandar, he signs a treaty with Maan Singh and surrenders 23 forts to the Mughal Emperor and agreed to go to Delhi, but on his conditions. Maan Singh agreed to Shivaji’s conditions, but before that Shivaji had mentally disturbed Maan Singh by arousing the Rajput pride in him. Shivaji’s dealings with the Adilshahi, Nizamshahi and the Mughals is a best example of his statesmanship.

Bravery : He always led his men from the front. His idea of “Ganimikava” is a matter of study for students of warfare even today. After killing Afzal Khan, he led his men to Kolhapur winning all the forts on his way in a spam of 40 odd days.

There are many such qualities of Shivaji Maharaj which can be talked about. All these qualities were imbibed into him by his Mother Jijabai. Jijabai under her guidance had moulded Shivaji into what he was. His mentor Dadaji Konddev, a trusted lieutenant of Shahaji, Shivaji’s father, also has played a major role in his upbringing.

I, bow down to this great warrior on His birthday and end with an “Aarti” written by Veer Savarkar.
जयदेव जयदेव जय जय शिवराया !
या या अनन्य शरणा आर्यां ताराया !!धृ!!
आर्यांच्या देशावरि म्लेंच्छांचा घाला
आला आला सावध हो भूपाला
सद् गदिता भूमाता दे तुज हाकेला
करुणारव भेदुनि तव ऱ्हिदय न कां गेला?…..१
श्री जगदंबा जीस्तव शुंभादिक भक्षी
दशमुख मर्दुनी जी श्रीरघुवर संरक्षी
ती पूता भूमाता म्लेंच्छाही छळता
तुजविण शिवराया तिज कोण दुजा त्राता?…….२
त्रस्त अम्हि दीन अम्हि शरण तुला आलो
परवशतेच्या पाशी मरणोन्मुख झालो
साधु परित्राणाया दुष्कृती नाशाया
भगवन् भगवतगीता सार्थ कराया या……….३
ऐकुनिया आर्यांचा धावा गहिवरला
करुणोक्ते स्वर्गी श्री शिवनृप गहिवरला
देशास्तव शिवनेरी घेई देहाला
देशास्तव रायगडी ठेवी देहाला
देशस्वातंत्र्याचा दाता जो झाला
बोला तत् श्रीमत्शिवनृप् की जय बोला……….४
बोला शिवाजी महाराज की जय….

राजाधीराज छत्रपती शिवराय दुर्गपती गजअश्वपती
भूपती प्रजापती सुवर्णरत्नंश्रीपती
अष्टप्रधान वेष्टीत
न्यायालंकार मंडीत
शस्त्रास्त्रशांस्त्र पारंगत
राजनीती धुरंधर
पौढप्रताप पुरंदर
क्षत्रीयकुलावतंस सिँहासनाधीश्वर
राजाधिराज महाराज श्रीमंत
श्री छत्रपती
श्री शिवाजी महाराज कि जय..


Am a teacher by profession. A student of History and international politics. Believe that Bhakti (Devotion) and Humanism can only save Humanity. Revere all creation. My thoughts are influenced by His Holiness Pandurang Shashtriji Athavale

41 thoughts on “Maharaj Shiv Chhatrapati

  1. Alas!!! they don’t teach these things in history …prime focus on अकबर बाबर के खुराफात पर बस … syllabus change hona chahiye … महाराणा प्रताप, शिवाजी , चन्द्र गुप्त , चाणक्य आदि महान व्यक्तिततव को भी पढ़ाना चाहिए …

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    1. भाई हम अपना इतिहास पढ़ते कब हैं।मेरी वीरता विदेशियों ने लिखा जिसने देखा। जलाकर मिटाकर जो बचा उसे कुछ लोग रौंद दिए। यहां के कण कण में वीरता की मिसाल है। और हम जो हमारे भक्षक थे उनका गुण गाते हैं।

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  2. Thank you for reminding us the historic facts & qualities of Shri. Shivaji Maharaj from we can learn so much 😊♥️

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  3. Father & Founder of Indian Navy 💪
    Guerilla Warfare ,
    Shrewd tactics .

    All my Life I’ve always preached him.
    And strongly inspired by his principles & teachings.

    Thank you Ameet for reaching us about our 1st CHHATRAPATI MAHARAJ 🚩
    Well written ! 🙂

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  4. पूरी मुगल्ल सल्तनत काँपती थी शिवाजी महाराज का नाम सुन कर। हमें गर्व है कि हम उस देश के वाशी है जहाँ शिवाजी महाराज रहते थे। बहुत हि बेहतरीन लेख लिखा है आपने शिवाजी महाराज के उपर।

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  5. मैं शिवाजी महाराज की एक वीर गाथा आपके साथ साझा करता हूं

    दक्षिण भारत का एक छोटा-सा राज्य था बेल्लारी। उसका शासक कोई वीर पुरुष नहीं बल्कि शौर्य की प्रतिमा विधवा नारी मलबाई देसाई थीं। छत्रपति शिवाजी की सेना ने बेल्लारी पर चढ़ाई की । शिवाजी की विशाल सेना का सामना वहाँ के मुट्ठीभर सैनिक कैसे करते ! किंतु बेल्लारी के सैनिक खूब लड़े । छत्रपति ने उन शूरों के शौर्य को देख के उनकी खूब प्रशंसा की ।

    पर बेल्लारी की सेना की पराजय तो पहले से निश्चित थी । वह हार गयी और मलबाई को बंदी बनाकर सम्मानपूर्वक छत्रपति शिवाजी के सामने लाया गया । इस सम्मान से मलबाई प्रसन्न न थीं ।

    बाई ने शिवाजी से कहा : ‘‘एक नारी होने के कारण मेरा यह परिहास क्यों किया जा रहा है ? छत्रपति ! तुम स्वतंत्र हो और थोड़ी देर पहले मैं भी स्वतंत्र थी । मैंने स्वतंत्रता के लिए पूरी शक्ति से संग्राम किया है किंतु तुमसे शक्ति कम होने के कारण मैं पराजित हुई । अतः तुम्हें मेरा अपमान तो नहीं करना चाहिए । तुम्हारे लोगों का यह आदर-दान का अभिनय अपमान नहीं तो और क्या है ? मैं शत्रु हूँ तुम्हारी, तुम मुझे मृत्युदंड दो ।’’

    छत्रपति सिंहासन से उठे, उन्होंने हाथ जोड़े :  
    ‘‘आप परतंत्र नहीं हैं; बेल्लारी स्वतंत्र था, स्वतंत्र है । मैं आपका शत्रु नहीं हूँ, पुत्र हूँ । अपनी तेजस्विनी माता जीजाबाई की मृत्यु के बाद मैं मातृहीन हो गया हूँ । मुझे आपमें अपनी माता की वही तेजोमयी मूर्ति के दर्शन होते हैं। आप मुझे अपना पुत्र स्वीकार कर लें ।’’

    मलबाई के नेत्र भर आये । वे गद्गद कंठ से बोलीं :
    ‘‘छत्रपति !तुम सचमुच छत्रपति हो । हिन्दू धर्म के तुम रक्षक हो और भारत के गौरव हो । बेल्लारी की शक्ति तुम्हारी सदा सहायक रहेगी ।’’

     महाराष्ट्र और बेल्लारी के सैनिक भी जब ‘छत्रपति शिवाजी महाराज की जय !’ बोल रहे थे, तब स्वयं छत्रपति ने उद्घोष किया, ‘माता मलबाई की जय !’

    हिन्दू एकता एवं हिन्दवी स्वराज्य के लिए जीवन अर्पण करनेवाले भारत के वीर सपूत छत्रपति शिवाजी महाराज ने ‘मलबाई का राज्य कभी अंग्रेजों के अधीन नहीं हो सकता’ इसका विश्वास होते ही उन्हें स्वतंत्र रहने देने का उद्घोष किया और हिन्दू-एकता और संस्कृति-रक्षा का स्वर्णिम इतिहास रचा।

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    1. मेरा इतिहास पढ़ते जाओ खत्म ही नही होता और रोज नया कुछ मिल जाता है जिसे पढ़ खून में उबाल आ जाता है। और शिवाजी का नाम ही काफी है खून को गर्म करने के लिए। वाकई जब जब नरभक्षी आये है तब तब कुछ ऐसे वीर भारत माँ की कोख से निकल आये की आज हम हम हैं। बहुत बढ़िया पोस्ट और उसपर आपकी ये प्रतिक्रिया काबिलेतारीफ।जय हिंद।

      Liked by 3 people

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